मुख्य मजकुराकडे जा

अस्पृश्य का विद्रोह, गांधी और उनका अनशन, पूना पैक्ट -  लेखक -  डॉ. भीमराव आम्बेडकर

Asprishy ka vidroh Gandhi aur Unka anshan Poona pact Written by dr Bhimrao Ramji Ambedkar

Page 36 of 52
18 ऑक्टोबर 2023
Book
5,,7,1,13,,

पंजाब

पंजाब सरकार की राय :

      पंजाब सरकार की राय है कि पट्टेदार को मताधिकार देने से दलित वर्ग के काफी लोगों को मताधिकार मिल जाएगा और उस इद तक कौंसिल के लिए प्रतिनिधि चुनने में उनका प्रभाव बढ़ जाएगा।¹

      जहां तक दलित वर्गों का संबंध है, पंजाब सरकार को ऐसा कोई कारण नहीं दीखता कि वह अपने उस दृष्टिकोण से विमुख हो जाए, जिसे वह ज्ञापन के पैरा 2.5 में व्यक्त कर चुकी है। इस ज्ञापन में भारतीय सांविधिक आयोग की सिफारिशों के बारे में पंजाब सरकार से सरकारी सदस्यों के ये विचार हैं कि पंजाब के रूप में कुछ प्रतिनिधित्व प्राप्त हो जाएगा। ²

Karodo Ki Aabadi Ko Nakarne Ka Prayas janganana Census of India Rajniti Politics Asprishy ka vidroh Gandhi aur Unka anshan Poona pact author B R Ambedkar

      पंजाब प्रांत की मताधिकार कमेटी की रायः

      के.बी. दीन मुहम्मद तथा श्री हंसराज (जो कमेटी में अस्पृश्यों के प्रतिनिधि थे) की राय है कि जहां मुसलमानों में कोई दलित वर्ग नहीं है, वहां हिंदुओं तथा सिक्खों में दलित वर्ग हैं। .... उनकी कुल संख्या 1,310,709 है। श्री हंसराज का विचार है कि यह सूची अधूरी है।

      उनकी राय है कि दलित वर्गों को एक अलग समुदाय मानकर उनके लिए पृथक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जाए। श्री नाजिर हुसैन, राय बहादुर चौधरी, श्री छोटू राम, श्री ओम राबर्ट्स, के. बी. मुहम्मद हयात, श्री कुरेशी, श्री चटर्जी, सरदार भूटा सिंह और पंडित नानक चंद की राय है कि यह कहना असंभव है कि पंजाब में इस अर्थ में कोई दलित वर्ग है कि अपने धर्म के कारण किसी व्यक्ति के नागरिक अधिकार का हनन होता है। अध्यक्ष पंडित नानक चंद तथा सरदार भूटा सिंह की राय है कि जिस अर्थ में दक्षिण भारत में दलित वर्ग विद्यमान है, उस अर्थ में वे पंजाब में नहीं है। जहां गांवों में कुछ ऐसे वर्ग हैं जिनकी आर्थिक तथा सामाजिक स्थिति निश्चय ही अति दीन व हीन है, वहां यह संभव नहीं है कि जिस हिंदू चर्मकार या चमार को दलित वर्ग कहा जाता है, उसका विभेद उस मुसलमान चर्मकार या मोची से किया जाए, जिसके बारे में कोई नहीं कहता कि वह अलग वर्ग का है।³

      अतः इससे स्पष्ट हो जाता है कि पंजाब प्रांत की सरकार इस प्रश्न का उत्तर देने से कतरा गई। पंजाब प्रांत की कमेटी ने बहुमत से इंकार कर दिया कि प्रांत में दलित अथवा अस्पृश्य जैसा कोई वर्ग है।


1. भारतीय मताधिकार कमेटी को दिया गया पंजाब सरकार का ज्ञापन, आई.एफ.सी., खंड 3
2. पंजाब सरकार का अनुपूरक ज्ञापन, आई.एफ.सी., खंड 3, पृ. 29
3. पंजाब प्रांत की मताधिकार कमेटी का ज्ञापन, आई.एफ.सी., खंड 3, पृ. 35


संयुक्त प्रांत

प्रांतीय मताधिकार कमेटी की रायः

      संयुक्त प्रांत मताधिकार कमेटी की राय है कि केवल उन्हीं वर्गों को 'दलित' कहा जाए, जो अस्पृश्य हैं। इस कमेटी के अनुसार इन प्रांतों में अस्पृश्यता की समस्या है ही नहीं। अपवाद केवल भंगियों, डोनों तथा धानुकों का है। उनकी कुल संख्या स्पृश्य वर्गों सहित केवल 582,000 है।¹

      संयुक्त प्रंत की प्रांतीय मताधिकार कमेटी में अस्पृश्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य बाबू रामसहय ने अपने विमत टिप्पण में कहा कि संयुक्त प्रांत में अस्पृश्यों की संख्या² 1, 14, 35, 117 है। संयुक्त प्रांत की प्रांतीय मताधिकार कमेटी में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक और सदस्य राय साहब बाबू रामचरन ने अपने विमत टिप्पण में कहा कि संयुक्त प्रांत में दलित वर्गों की संख्या³ दो करोड़ है।

      संयुक्त प्रांत की सरकार ने सूचना⁴ दी कि अधिकतम अनुमान एक करोड़ 70 लाख का है और न्यूनतम अनुमान 10 लाख से कुछ कम है। उनकी राय में संख्या 67, 73, 814 से अधिक नहीं है।


बंगाल

बंगाल प्रांत की मताधिकार कमेटी ने अपनी पहली रिपोर्ट⁵ में कहा :

      कमेटी इस प्रश्न के बारे में किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी और उसने संकल्प किया कि उसे केंद्रीय कमेटी के पास विचार के लिए वापस भेज दिया जाए।

      अपनी अंतिम रिपोर्ट में उसी कमेटी ने कहा :

      निर्धारित कसौटी के अनुसार, अर्थात् अस्पृश्यता और असामीप्यता के अनुसार, जैसा कि इन शब्दों से भारत के अन्य भागों में अभिप्रेत है, कमेटी का विचार है। कि केवल भुईमाली को छोड़कर बंगाल में ऐसा कोई अन्य वर्ग नहीं है ।⁶

      बंगाल प्रांत की मताधिकार कमेटी में दलित वर्गों के प्रतिनिधि श्री मल्लिक ने अपने विमत टिप्पण में अनुसूचित वर्गों की 86 जातियों की सूची प्रस्तुत की।


1. आई. एफ. सी., खंड 5. पृ. 398
2. वही, पृ. 440
3. वही 5. पृ. 285
4. वही, पृ. 297-98
5. वही, पृ. 189
6. वही, पृ. 230